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कानपुर| पद्म टावर स्टॉक एक्सचेंज में हिंदुस्तान हिंदी दैनिक के तत्वावधान में साल भर के भीतर न्याय मिलने के लिए मंथन बैठक का आयोजन किया गया| बैठक में तमाम विद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने भाग लिया| बैठक में चर्चा के तीन सत्र आयोजित किये गए| प्रथम सत्र में कार्यक्रम के संचालक और फाइनल जस्टिस @365 के संयोजक गौरव बाजपेई ने न्याय पालिका के सुधार कार्यक्रम के अंतर्गत विगत एक वर्ष में किये गए कार्यों और विद्यालयों के सौजन्य से किये गए आयोजनों का ब्यौरा प्रस्तुत किया| अपनी प्रस्तुति में गौरव बाजपेई ने बलात्कारों को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की और सभा में उपस्थित गणमान्य नागरिकों से इस विषय में एकजुट होने की अपील की| उन्होंने यह भी बताया कि विगत वर्ष के तमाम कार्यक्रमों के अंतर्गत साल भर के भीतर न्याय मिलने की गुहार में उन्होंने तमाम विद्यालयों के छात्र-छात्राओं और अध्यापकों के साथ मिलकर एक लाख पत्रों को प्रधानमंत्री कार्यालय भेजा| इस पत्राचार के परिणामस्वरूप न्याय व्यवस्था की विसंगतियों की गंभीर बातें सामने आयीं| गौरव बाजपेई ने प्रधानमंत्री के सचिव नृपेन्द्र मिश्र के हवाले से बताया कि इस समय सरकार और न्यायपालिका की खासी अनबन है| न्यायपालिका में सुधारों के लिए खुद न्यायपालिका ही तैयार नहीं है| महिलाओं के खिलाफ अत्याचार में न्याय पालिका की सुस्ती भी जिम्मेदार है| न्यायपालिका की यह हालत बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों के लिए भी संवेदनशील नजर नहीं आती है| छोटी बच्चियों, महिलाओं , वृद्धा आदि के बलात्कारों के मामले में 365 दिनों के भीतर न्याय मिलना चाहिए| जघन्यतम मामलों में सजाएं मौत के प्रावधान पर सभी ने सर्वसहमति जताई। पीड़ित महिलाओं को लेकर एकजुट हुए लोगों ने संगठित होकर न्यायपालिका में सुधार के लिए प्रयास जारी रखने का संकल्प लिया| परिचय सत्र के संबोधन के उपरांत महिला प्रधानाचार्यों का एक पैनल डिस्कशन संचालित किया गया| इस पैनल डिस्कशन में चर्चा का प्रमुख विषय रहा कि महिलाओं के प्रति हो रहे अत्याचारों से बचाव के लिए क्या किया जाए| पैनल की लगभग सभी वक्ताओं ने यह माना कि महिलाओं के प्रति होने वाली यौन हिंसा सामाजिक गिरावट का प्रतीक है जिसके लिए छात्र-शिक्षकों के माध्यम से सतत अभियान चलाने की जरुरत है| पैनल के एकमात्र पुरुष प्रतिभागी और सीबीएसई कोऑर्डिनेटर बलविंदर सिंह ने इसके लिए हिन्दू समाज की साहित्यिक और सांस्कृतिक विकृतियों को दोषी ठहराते हुए कहा कि जहाँ धर्म ग्रंथों में “ढोल गंवार शुद्र पशु नारी, सकल ताड़ना के अधिकारी” जैसा फरमान मौजूद हो वहां पर महिलाओं के लिए संवेदना की उम्मीद कैसे की जा सकती है| सभा के उपरांत श्री सिंह के इस वक्तव्य के विरोध में तमाम प्रतिक्रियाएं भी सुनी गयीं| एक प्रतिक्रिया देते वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता शिवेन्दु मिश्र ने तुलसी के रामचरित मानस की एक चौपाई को उदधृत करके बताया कि तुलसी ने महिलाओं अत्याचारी के लिए वध का दण्ड स्पष्ट रूप लिखा है, लेकिन अमूमन लोगों को रामचरित मानस में से अपने मतलब भर की आलोचना ही रुचिकर लगती है|
अनुज वधू भगिनी सुत नारी सुन सठ ये कन्या सम चारी
इन्हें कुदृष्टि बिलोके जोई, ताहि बधे कछु पाप न होई| तुलसी तो कहते हैं कि हे मूर्ख! सुन, छोटे भाई की स्त्री, बहिन, पुत्र की स्त्री और कन्या- ये चारों समान हैं। इनको जो कोई बुरी नीयत से देखता है, उसका वध करने में कुछ भी पाप नहीं होता होता|
कार्यक्रम में आये लोगों ने महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचारों की मुहीम को समर्पित गौरव बाजपेई को अपना समर्थन और शुभकामनायें प्रेषित कीं| कार्यक्रम के अंतिम चरण में प्रख्यात साहित्यकार और दैनिक जागरण के शीर्षस्थ पत्रकार सुरश अवस्थी ने उपस्थित श्रोताओं को अपनी कविताओं से झकझोरा|
कानपुर नगर के सीबीएसई कोऑर्डिनेटर बलविंदर सिंह, के के पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या पूजा सहगल, डीसी लॉ कॉलेज की पूर्व प्रधानाचार्या, डॉ. नंदिनी उपाध्याय, गुरु नानक गर्ल्स इंटर कॉलेज प्रीति कौर, मेडिकल कालेज की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. मीरा अग्निहोत्री, के के गर्ल्स इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या पूनम सिंह, सरस्वती गर्ल्स डिग्री कॉलेज नीरू निगम सिकोरिया , एस.एन.सेन गर्ल्स इंटर कॉलेज की श्रीमती पुष्पा त्रिपाठी, अर्मापुर पीजी कॉलेज की प्रधानाचार्या श्रीमती गायत्री सिंह, कानपुर विद्या मंदिर की प्राचार्या डॉ विनीता पांडेय, मेडिकल कॉलेज की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ आरती लाल चंदानी, जवाला देवी गर्ल्स इंटर कॉलेज की प्राचार्या श्रीमती रश्मि अस्थाना, डीसी लॉ कॉलेज के सहायक प्रोफेसर राजीव शुक्ला समेत तमाम प्रोफेसर,शिक्षिकाएं, छात्राएं, उपस्थित रहे।कार्यक्रम में राहुल, अजय विश्वकर्मा, अंश, मंजरी, शोभित का विशेष योगदान रहा| इस जुटान में स्वल्पाहार का प्रबंध शहर के प्रमुख कंप्यूटर व्यवसायी संदीप जैन ने किया| आयोजकों द्वारा उनको कोटिशः धन्यवाद ज्ञापित किया गया|
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